Jun 22, 2024, 10:28 IST

वल्र्ड म्यूजिक डे पर कलाकारों ने बताया कि वे संगीत में कितने बड़े उस्ताद हैं! ​​​​​​​

वल्र्ड म्यूजिक डे पर कलाकारों ने बताया कि वे संगीत में कितने बड़े उस्ताद हैं!
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संगीत में भावनाओं को जगाने, उत्साह बढ़ाने और मुश्किल वक्त में राहत देने की ताकत होती है। किसी वाद्ययंत्र को बजाने या संगीत सुनने से थेरैपी जैसा अनुभव भी मिलता है। वल्र्ड म्यूजिक डे पर एण्डटीवी के कलाकार संगीत और वाद्ययंत्रों के लिये अपने प्यार के बारे में बता रहे हैं। यह कलाकार हैं राहुल जेठवा (अवध बिहारी वाजपेयी, ‘अटल’), गीतांजलि मिश्रा (राजेश, ‘हप्पू की उलटन पलटन’) और शुभांगी अत्रे (अंगूरी भाबी, ‘भाबीजी घर पर हैं’)। अटल में अवध बिहारी वाजपेयी की भूमिका निभा रहे राहुल जेठवा ने बताया, ‘‘संगीत मेरे लिये शांति पाने का जरिया है। मेरा भाई और मैं एक्टर होने के अलावा संगीतकार भी हैं। बचपन में युगल गीतों पर परफाॅर्म करने और साथ मिलकर वाद्ययंत्र बजाने की प्यारी यादें हमारे साथ हैं। हमने अपने खाली वक्त में कुछ गाने बनाये और कम्पोज किये हैं। हम और भी गाने रिकाॅर्ड करना चाहते हैं। गाने के अलावा, मैं गिटार और हारमोनियम बजा सकता हूँ। मैं जब भी शूटिंग नहीं कर रहा होता हूँ, तब घर पर संगीत की रचना करना मुझे पसंद है। हारमोनियम बजाने की मेरे दिल में एक खास जगह है। उसकी गहरी और गूंजने वाली आवाज में कुछ तो ऐसा होता है, जो बड़ी राहत देता है। मैं अक्सर मेलोडीज में खो जाता हूँ, मेरा तनाव दूर हो जाता है और हर नोट मेरी चिंताओं को खत्म करता जाता है। हारमोनियम में मुझे अपनी उंगली की गति से अपनी सांस का समन्वय रखना पड़ता है। और रिदम का यह तरीका लगभग ध्यान करने जैसा हो जाता है। इससे मुझे एकाग्र रहने में मदद मिलती है और मेरे दिमाग को शांति तथा संतुलन का अनुभव होता है। संगीत के बिना तो दुनिया भी बेरंग होती। ’’ 

‘हप्पू की उलटन पलटन‘ में अपने किरदार राजेश के लिये मशहूर गीतांजलि मिश्रा ने बताया, ‘‘संगीत के लिये मेरा सफर घर से शुरू हुआ था। मैं पारिवारिक आयोजनों में दादी माँ को पारंपरिक लोकगीत गाते सुनती थी। मैं वाराणसी की हूँ, जो सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और आध्यात्मिक रूप से काफी संपन्न शहर है। मेरी माँ और दादी माँ के कारण मैं हमेशा से संगीत और कला के बीच रही हूँ। मेरी दादी माँ की आवाज में कई पीढ़ियों के स्वर थे। उनके गीतों में प्यार, बहादुरी, भक्ति और प्रकृति की कहानियाँ होती थीं। उनसे प्रेरित होकर मैंने भी उनके साथ गाना शुरू कर दिया और जल्दी ही यह मेरा जुनून बन गया। मैं अब भी बहुत अच्छा नहीं गाती हूँ, लेकिन जहाँ तक संभव हो, अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करती रहती हूँ। उनके साथ अभ्यास करते हुए मैं घंटों बिता दिया करती थी। मैं हर गाने की बारीकियों और भावनाओं में परिपक्व होने की कोशिश करती थी। मेरी माँ कहती हैं कि संगीत सिर्फ कला का एक रूप नहीं है; यह जीने का एक तरीका है और आत्मा की अभिव्यक्ति है। लोक संगीत की विशुद्धता मुझे सबसे ज्यादा पसंद है। इसमें कोई मिलावट नहीं होती, यह विशुद्ध होता है और सीधे दिल से निकलने वाला होता है। मुझे गाने के अलावा सितार बजाना भी बहुत पसंद है। सितार के सुरों से लोक संगीत के आत्मिक अनुभव को पूर्णता मिलती है। सितार बजाने से मैं भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ जुड़ जाती हूँ। और फिर वह लोक परंपराओं की विशुद्ध एवं देहाती सुंदरता के साथ घुलमिल जाता है। मेरी आवाज और सितार से एक खूबसूरत संगम बनता है, जो हर गाने के भाव को बाहर लेकर आता है। इस तरह संगीत ज्यादा दिलचस्प और लुभावना हो जाता है।’’ ‘भाबीजी घर पर हैं‘ की अंगूरी भाबी, ऊर्फ शुभांगी अत्रे ने बताया, ‘‘ज्यादातर लोग मुझे प्यारी और अजीब-सी अंगूरी भाबी के रूप में जानते हैं। लेकिन कई लोगों को संगीत के बारे में मेरी पसंद का पता नहीं है। उन्हें लगता है कि मेरी पसंद के संगीत में सिर्फ हिन्दी और भोजपुरी गाने होंगे। हालांकि संगीत में मेरा सफर काफी बड़ा है। मुझे गाने और गिटार बजाने से बहुत प्यार है। यह जुनून मैंने अपनी बेटी के साथ खोजा और बढ़ाया है। उसने और मैंने साथ में गिटार बजाना सीखने की शुरूआत की थी। और फिर यह गतिविधि हमें बहुत पसंद आने लगी। मैं गिटार बजाने में विशेषज्ञ नहीं हूँ। लेकिन कुछ काॅर्ड्स सीख चुकी हूँ और वे आसान-सी मेलोडीज मेरी जिन्दगी में बड़ी खुशियाँ लेकर आती हैं। मुझे घर पर जब भी खाली वक्त मिलता है, मैं उत्सुकता से गिटार उठा लेती हूँ और अपने पौधों को प्यार भरे गीत सुनाती हूँ। अपने पौधों के सामने गाने से मुझे थेरैपी जैसा एहसास तो होता ही है, उनसे काफी जुड़ाव जैसा लगता है और शांति भी मिलती है। यह एक अनोखा काम है, जिससे मुझे राहत मिलती है और मेरी रचनात्मकता दिखाने का मौका मिलता है। इससे मेरे और पौधों के बीच एक खास रिश्ता बन जाता है। अपने पौधों के लिये संगीत बजाने से मुझे संतोष और सौहार्द्र का अनुभव होता है। और ऐसे पल सचमुच खास और प्यारे होते हैं। इस वल्र्ड म्यूजिक डे पर, आइये हम संगीत की बेमिसाल विविधता को खोजें और साझा करें। उस सार्वभौमिक भाषा की सराहना करें, जो हम सभी को एकजुट करती है।’’ 


अपने चहेते कलाकारों को देखिये ‘अटल’ में रात 8ः00 बजे, ‘हप्पू की उलटन पलटन’ में रात 10ः00 बजे और ‘भाबीजी घर पर हैं’ में रात 10ः30 बजे, हर सोमवार से शुक्रवार 
सिर्फ एण्डटीवी पर!

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