Supreme Court की यह टिप्पणी केवल महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के खेल प्रशासनों के लिए एक संदेश है कि मैदान की समझ और खेल की भावना ही नेतृत्व की असली पहचान होनी चाहिए। आने वाले दिनों में इस रुख का असर नीतियों, चुनाव प्रक्रियाओं और खेल संघों की संरचना पर गहराई से देखने को मिल सकता है।
Supreme Court की क्रिकेट संघों पर सख्त टिप्पणी: खेल की कमान खिलाड़ियों के हाथ में हो, बैट न पकड़ने वालों से दूर रहे मैदान
