विवेक झा, भोपाल/एकता नगर (गुजरात) |
“भारत का हृदय—मध्यप्रदेश” ने एक बार फिर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कलात्मक वैभव और विविध परंपराओं से देशभर के दर्शकों का दिल जीत लिया। गुजरात के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, एकता नगर में चल रहे 15 दिवसीय भारत पर्व–2025 के अंतर्गत 11 नवम्बर 2025 को मध्यप्रदेश दिवस अत्यंत उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, राजेंद्र शुक्ल, एवं संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
“भारत का हृदय सबसे सुंदर” — अतिथियों की प्रतिक्रिया
मध्यप्रदेश दिवस की झलकियों ने सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। राज्यपाल श्री मंगूभाई पटेल ने कहा, “मध्यप्रदेश की संस्कृति भारत की आत्मा का परिचायक है। यहां की कला, लोक परंपरा और प्रकृति का संतुलन भारत को एकता के सूत्र में बांधता है।”
अतिथियों ने भारत दर्शन प्रदर्शनी के अंतर्गत विभिन्न राज्यों के पवेलियन का भ्रमण किया और मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड (MP Tourism) द्वारा तैयार किए गए आकर्षक थीम पवेलियन की विशेष प्रशंसा की। इस पवेलियन में प्रदेश की पर्यटन, संस्कृति, धरोहर और हस्तशिल्प की अद्भुत झलक प्रस्तुत की गई, जो सभी आगंतुकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी।

‘स्टूडियो किचन’ में महक उठे मालवा-बुंदेलखंड के स्वाद
कार्यक्रम में मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम (MPTDC) द्वारा “स्टूडियो किचन” की विशेष लाइव प्रस्तुति दी गई। इस दौरान प्रदेश के पारंपरिक व्यंजन — दाल-बाफला, भुट्टे का कीस, पोहा-जलेबी, मावा बाटी और गोंद के लड्डू — प्रस्तुत किए गए।
अतिथियों और आगंतुकों ने प्रदेश के इन पारंपरिक स्वादों का आनंद लिया और उनकी भरपूर सराहना की।

‘अमृतस्य मध्यप्रदेश’ ने सांस्कृतिक यात्रा को बनाया अविस्मरणीय
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा “अमृतस्य मध्यप्रदेश” शीर्षक से प्रस्तुत नृत्य-संगीत की भव्य समवेत प्रस्तुति। संस्कृति विभाग की ओर से यह प्रस्तुति नृत्य संयोजिका मैत्रेई पहाड़ी द्वारा संयोजित की गई थी।
इस प्रस्तुति ने दर्शकों को मध्यप्रदेश की हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता, भक्ति, प्रेम, प्रकृति और आध्यात्मिकता की लय से जोड़ दिया।

नृत्यगाथा की शुरुआत भीमबेटका की गुफाओं से हुई — जहां मानव सभ्यता की पहली झलक दिखाई देती है। इसके बाद मंच पर क्रमशः खजुराहो की मूर्तिकला, सांची के स्तूपों की शांति, चित्रकूट की भक्ति भूमि, उज्जैन और ओंकारेश्वर के ज्योतिर्लिंगों की दिव्यता, ग्वालियर किले की ऐतिहासिकता, मांडू की प्रेमकथा, और ओरछा के मंदिरों की भव्यता का अद्भुत संयोजन प्रस्तुत किया गया।
प्रकृति और मानव के संबंध को कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच के वनों के दृश्यों से दर्शाया गया, जबकि जबलपुर की संगमरमर चट्टानें इस प्रस्तुति को सौंदर्य के चरम पर ले गईं। कलाकारों ने महेश्वरी, चंदेरी और बाघ प्रिंट परिधानों में मंच पर मध्यप्रदेश की शिल्प विरासत का गौरव गान किया।
कार्यक्रम के अंत में नर्मदा आरती के दृश्य के साथ प्रस्तुति अपने आध्यात्मिक उत्कर्ष पर पहुँची, जिसने पूरे सभागार को श्रद्धा और गर्व की अनुभूति से भर दिया।
मध्यप्रदेश — संस्कृति, सृजन और सौंदर्य का संगम
भारत पर्व में मध्यप्रदेश की प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि राज्य न केवल भौगोलिक रूप से भारत का हृदय है, बल्कि सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी देश की आत्मा का केंद्र है।
अतिथियों ने कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल राज्यों की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करते हैं बल्कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को भी सशक्त करते हैं।
