Muzaffarnagar किसान प्रदर्शन प्रकरण ने यह साफ कर दिया है कि जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था को ठप करना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं। प्रशासन की सख्ती और दर्ज मुकदमों के बाद यह मामला आने वाले दिनों में जिले की राजनीति और आंदोलनकारी संगठनों की रणनीति को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
Muzaffarnagar में किसान प्रदर्शन से हड़कंप: भाकियू अराजनैतिक पर सख्ती, SSP कार्यालय घेराव के बाद 4 बड़े नेता नामजद, 400 अज्ञात पर मुकदमा
