Muzaffarnagar खतौली की यह घटना अपने आप में अनोखी जरूर है, लेकिन इसके पीछे छिपा संदेश बेहद साफ है—सम्मान हर व्यक्ति के लिए जरूरी है, चाहे वह किसी भी भूमिका में क्यों न हो। कूड़े का यह ढेर अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि एक सामाजिक संकेत बन चुका है, जिस पर चर्चा दूर तक जाएगी।
“नेता जी से उलझना पड़ा भारी”: खतौली Muzaffarnagar में सफाईकर्मियों ने घर के बाहर लगा दिया कूड़े का ‘सम्मान’
