Muzaffarnagar riots से जुड़ा यह फैसला कानून की प्रक्रिया का अंत हो सकता है, लेकिन सामाजिक स्मृति में इसके असर लंबे समय तक बने रहेंगे। साक्ष्य के अभाव में आया यह निर्णय न्याय व्यवस्था, जांच तंत्र और दंगा पीड़ितों की उम्मीदों—तीनों के लिए एक गहरी सीख छोड़ जाता है।
Muzaffarnagar riots केस में 13 साल बाद बड़ा फैसला: रईसुद्दीन हत्याकांड सहित आगजनी-लूट मामलों में 22 आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी
